संस्कृति और परंपरा: भारत की विवाह रस्में और रीति-रिवाज़
भारत की विवाह परंपराएँ उसकी सांस्कृतिक विविधता का आलम लिए हुए हैं। हिन्दू, मुस्लिम, सिख, जैन, और अन्य समुदायों की शादी की रस्में न केवल अनोखी हैं, बल्कि गहरे अर्थ और प्रेम से भरी हैं। आइए, कुछ प्रमुख परंपराओं पर नज़र डालें।
1. हिन्दू विवाह
- रोका और सगाई: रिश्ते की औपचारिक शुरुआत, जहाँ परिवार उपहारों का आदान-प्रदान करते हैं।
- हल्दी और मेहंदी: दूल्हा-दुल्हन को हल्दी और मेहंदी लगाई जाती है, जो सौभाग्य का प्रतीक है।
- सात फेरे: विवाह की मुख्य रस्म, जहाँ दंपति सात वचन लेते हैं।
- टिप: हर क्षेत्र में फेरों के साथ गाए जाने वाले मंत्र और रिवाज अलग हो सकते हैं।
2. मुस्लिम विवाह
- निकाह: मौलवी की उपस्थिति में कबूलनामा, जो रिश्ते को पवित्र बनाता है।
- मेहर: दूल्हे द्वारा दुल्हन को दी जाने वाली राशि या उपहार।
- वलिमा: शादी के बाद का भोज, जो खुशी का प्रतीक है।
- टिप: निकाह के दौरान परिवार की सहमति और सादगी पर जोर दिया जाता है।
3. सिख विवाह
- आनंद कारज: गुरुद्वारे में गुरु ग्रंथ साहिब के सामने चार लावां (फेरे) लिए जाते हैं।
- मिलनी: दोनों परिवारों का औपचारिक मिलन, जहाँ उपहार और शगुन दिए जाते हैं।
- टिप: सिख विवाह में संगीत और उत्सव का माहौल बहुत जीवंत होता है।
4. जैन विवाह
- लगन पत्रिका: शुभ मुहूर्त और कुंडली मिलान के बाद रिश्ते की घोषणा।
- फेरों की रस्म: जैन मंत्रों के साथ सात फेरे लिए जाते हैं।
- टिप: जैन विवाह में सादगी और धार्मिकता पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
निष्कर्ष
भारत की विवाह परंपराएँ हर समुदाय में अलग-अलग रंग और उत्साह लाती हैं। ये रस्में न केवल दो लोगों को जोड़ती हैं, बल्कि परिवारों और संस्कृतियों को भी एक सूत्र में बाँधती हैं। अपनी परंपराओं को समझें और उन्हें गर्व के साथ अपनाएँ।